https://www.youtube.com/watch?v=653jpiS1sxc ☝ऊपर के लिंक को क्लिक करके यूट्यूब वीडियो देखें - किसी भी चल-अचल या सजीव निर्जीव की गणना कर आकड़ो में प्रस्तुत करना सर्वे कहलाता हैं। परन्तु यहाँ सर्वे का तात्पर्य जमीन सर्वे से हैं। इसमें पूर्व में किये गए सर्वे की कमियों को सुधर कर नया रूप दिया जाता हैं।पुराने नक़्शे के आधार पर नया नक्शा बनाया जाता हैं। जमीन से सम्बंधित सभी कागजातों को बदलकर सर्वे समय का खतियान दे दिया जाता हैं. जिसमे उनके जमीन का बिवरण दर्ज होता हैं। सर्वे मुख्यता 50 वर्षों के बाद होता हैं। सर्वे मुख्यतः तीन चरणों में कराया जाता हैं। (१) किस्तवार (२) खानापूरी (३) तस्दीक एबं बुझारत (१) किस्तवार- यह सर्वे का प्रथम चरण हैं। इस चरण किसी मौजा(गांव )में सर्वे प्रारम्भ किया जाता हैं। सर्वप्रथम वहां सर्वे अधिकारी जाकर एक ग्राम सभा आयोजन करतें हैं। उसमें सभी ग्रामीणों की उपस्थिति अनिवार्य होती हैं। इस बैठक में ग्रामीणों को सर्वे की सुचना दी जाती हैं तथा नियमो को समझाया जाता जाता हैं। उपस्थित ग्रामीणों से ही 11 सदस्यों की समितिबनाया ...
वर्ष 1765 मैं छोटा नागपुर का क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आया तथा वहां मालगुजारी व्यवस्था लागू की गई। वर्ष 1793 में रामगढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थाई बंदोबस्त रेगुलेशन एक्ट लागू किया गया था। झारखंड में 1824 ईस्वी में प्रथम बार रही हो तो के अधिकारों को परिभाषित करते हुए उनकी सुरक्षा का प्रावधान किया गया । वर्ष 1834 ईस्वी में छोटा नागपुर क्षेत्र में विल्की सेन कानून लागू किया गया था बाद में इसे 1837 ईस्वी में कोल्हान में भी लागू किया गया। वर्ष 1862 ईस्वी में हुई हरिभूमि और मझियास भूमि को चिन्हित करने के लिए बाबू रखलदास हालदार के नेतृत्व में हुई हरी सर्वे प्रारंभ किया गया। छोटा नागपुर के क्षेत्र में 1879 ईस्वी में छोटा नागपुर भूस्वामी एवं कष्टकारी प्रक्रिया अधिनियम को लागू किया गया। वर्ष 1903 में मुंदरी फुटकट्टी दारी प्रथा को मान्यता प्रदान की गई। सन 1950 ईस्वी में बिहार भूमि सुधार अधिनियम को लागू किया गया था। ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए कुछ महत्वपूर्ण अधिनियम निम्नलिखित है छोटा नागपुर भूधरिति अधिनियम 1869 #छोटा नागपुर में भूमिहारी को भूत कृतियां नाम से भी जाना जाता है इस...
जब किसी बस्तु या जगह की पैमाईस किसी निश्चित मापदंड के सहारे किया जाता हैं,जो आसानी से समझा जा सके,पैमाना कहलाता हैं।यहा पैमाना से अभिप्राय जमिन के नाप से संबंधीत आधार से है।इसी आधार से नक्शा से जमिन की पैमाईस की जाती है।यह तीन प्रकार का होता है। (क) 16"=1 मील (ख) 32"=1 मील (ग) 64"= 1 मील पैमाना नक्शा पर ,नक्शा के बाई ओर लिखा जाता हैं।क्लिक करें इस लिंक को और पायें ज्यादा इन्फॉर्मेशन 👉 https://youtu.be/FzPnLAu6AgQ (क) 16"= 1 मील :-इस पैमाने के आधार पर उस जगह का नक्शा बनाया जाता है,जहां की आबादी कम हो,इसमे नक्शा जमिन की पैमाईस के अनुरुप ही बनाया जाता हैं या नक्शा से पैमाईस जमिन पर नक्शा के अनुरुप ही किया जाता हैं। जैसे-यदि किसी प्लॉट की लम्बाई जमीन पर 80कड़ी तथा चौड़ाई 50 कड़ी हो तो नक्शा पर भी उसी लम्बाई और चौड़ाई का बनायेंगे।तथा नक्शा से पैमाईस भी नक्शा के बताये हुए निर्देश पर ही करेंगे।अर्थात इस पैमाने मे यदि जमीन 1डिसमिल का है तो नक्शा पर भी उसे 1डिसमिल ही दर्शाया जायेगा। (ख) 32"= 1मिल:-इस पैमाने के आधार पर नक्शा उं क्षेत्र में बनाया जाता हैं,जाहा ...
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