सर्वे के इतिहास से आप क्या समझते है?
https://youtu.be/NAvD7D-cqEM
सर्वे का इतिहास काफी पुराना हैं।प्रारम्भ में सर्वे के विषय में किसी को भी कोई जानकारी नहीं थी। सर्वप्रथम यह जान लेना आवश्यक हैं की सर्वे से तात्पर्य जमीन के सर्वे से है।बहुत पहले जब जमिन से संबंधीत कोई कागकागजात या पैमाना नही था ,उस समय लोगों को काफी कठिनाईयो का सामना करना पड़ता था।क्योकी उस समय जमींदारी की प्रथा थी अर्थात जमीन के मालिक उस खेत पर काम करने वाले किसान नही थे बल्कि उसका मालिक वहा के जमींदार हुआ करते थे।वास्तव मे उस समय राजतंत्र था।लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से शासन जमींदार किया करते थे। वे लोगो के बीच जमिन की बन्दोबस्ती कर दिया करते थे,जो क्रमशह 2साल,5साल,7साल या 10 साल तक् के लिये किया जाता था ।इसके पश्चात उनसे जमिन ले ली जाती थी या नई दर पर पूनह उन्हे ही बन्दोबस्त कर दिया जाता था।इस बन्दोबस्ती के लिये वे कोई कागज भी नहीं देते थे तथा उस समय जमिन का लगान भी निश्चित नही था,जिस कारण कभी कभी किशां को एक ही खेत के लिये दो दो बार लगान्चुकाना पड़ता था ,इसके खिलाफ वे कोई आवाज भी नही उठा सकते थे,क्योकि उन्हें जमिन छिन जाने का भय बना रह्ता था।
सर्वे का इतिहास काफी पुराना हैं।प्रारम्भ में सर्वे के विषय में किसी को भी कोई जानकारी नहीं थी। सर्वप्रथम यह जान लेना आवश्यक हैं की सर्वे से तात्पर्य जमीन के सर्वे से है।बहुत पहले जब जमिन से संबंधीत कोई कागकागजात या पैमाना नही था ,उस समय लोगों को काफी कठिनाईयो का सामना करना पड़ता था।क्योकी उस समय जमींदारी की प्रथा थी अर्थात जमीन के मालिक उस खेत पर काम करने वाले किसान नही थे बल्कि उसका मालिक वहा के जमींदार हुआ करते थे।वास्तव मे उस समय राजतंत्र था।लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से शासन जमींदार किया करते थे। वे लोगो के बीच जमिन की बन्दोबस्ती कर दिया करते थे,जो क्रमशह 2साल,5साल,7साल या 10 साल तक् के लिये किया जाता था ।इसके पश्चात उनसे जमिन ले ली जाती थी या नई दर पर पूनह उन्हे ही बन्दोबस्त कर दिया जाता था।इस बन्दोबस्ती के लिये वे कोई कागज भी नहीं देते थे तथा उस समय जमिन का लगान भी निश्चित नही था,जिस कारण कभी कभी किशां को एक ही खेत के लिये दो दो बार लगान्चुकाना पड़ता था ,इसके खिलाफ वे कोई आवाज भी नही उठा सकते थे,क्योकि उन्हें जमिन छिन जाने का भय बना रह्ता था।

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