सर्वे क्या हैं? यह कितने चरणो मे संपन्न किया जाता हैं?
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किसी भी चल-अचल या सजीव निर्जीव की गणना कर आकड़ो में प्रस्तुत करना सर्वे कहलाता हैं। परन्तु यहाँ सर्वे का तात्पर्य जमीन सर्वे से हैं। इसमें पूर्व में किये गए सर्वे की कमियों को सुधर कर नया रूप दिया जाता हैं।पुराने नक़्शे के आधार पर नया नक्शा बनाया जाता हैं। जमीन से सम्बंधित सभी कागजातों को बदलकर सर्वे समय का खतियान दे दिया जाता हैं. जिसमे उनके जमीन का बिवरण दर्ज होता हैं। सर्वे मुख्यता 50 वर्षों के बाद होता हैं।
सर्वे मुख्यतः तीन चरणों में कराया जाता हैं।
(१) किस्तवार (२) खानापूरी (३) तस्दीक एबं बुझारत
(१) किस्तवार- यह सर्वे का प्रथम चरण हैं। इस चरण किसी मौजा(गांव )में सर्वे प्रारम्भ किया जाता हैं। सर्वप्रथम वहां सर्वे अधिकारी जाकर एक ग्राम सभा आयोजन करतें हैं। उसमें सभी ग्रामीणों की उपस्थिति अनिवार्य होती हैं। इस बैठक में ग्रामीणों को सर्वे की सुचना दी जाती हैं तथा नियमो को समझाया जाता जाता हैं। उपस्थित ग्रामीणों से ही 11 सदस्यों की समितिबनाया जाता हैं जो सर्वे कार्यो का देख-रेख करती हैं। इसके बाद सर्वेयर अपनी प्रत्तिनियुक्ति आदेश पत्रके के पीछे सभी ग्रामीणों का हस्ताक्षर करा लेते हैं। सर्वेयर सर्वे कार्य प्रारम्भ कर देते हैं। इसके लिए सर्वप्रथम समिति के सदस्यों तथा गांव के बुजुर्गो के साथ गांव की परिसीमा(सरहद)के के चारो तरफ घूम कर देख लेते हैं। साथ ही साथ एक नजरिया नक्शा पुराने नक़्शे के आधार पर बना लेते हैं। इसके बाद प्लाट की पैमाइस कर उसका नक्शा बनाया जाता हैं। और सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं।
(२) खानापूरी - यह सर्वे का दूसरा चरण हैं। इस चरण के अंतर्गत जो कार्य किस्तवार में किया जा चूका हैं उसे आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक प्लाट में नंबर उत्तर-पश्चिम कोण से प्रारम्भ कर दक्षिण-पूर्व कोण कोण पर समाप्त करते हैं तथा जमीं से सम्बंधित सभी सभी कागजातों के बदले नया खतियान दिया जाता हैं। यहाँ सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं। परन्तु इसमें पारदर्शिता लाने के लिए तीसरा चरण भी किया जाता हैं।
(३ )तस्दीक एबं बुझारत -यह सर्वे का तीसरा एबं अंतिम चरण हैं। तस्दीक का अर्थ होता हैं समझाना तथा बुझारत का अर्थ समझ बुझ कर लिखना होता हैं। इस चरण में सर्वे की त्रुटियों को पूर्णत दूर कर लिया जाता हैं। इसके लिए समिति की सहायता से ग्रामसभा का आयोजन कराया जाता हैंतथा प्रत्येक बेक्ति को खतियान पढ़कर सुनाया जाता हैंयदि गलती होती हैं तो उसे सुधारा जाता हैं। इसके बाद सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं। समाप्ति के दो या तीन माह के अंदर प्रत्येक बेक्ति को खतियान दे दिया जाता हैं।
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किसी भी चल-अचल या सजीव निर्जीव की गणना कर आकड़ो में प्रस्तुत करना सर्वे कहलाता हैं। परन्तु यहाँ सर्वे का तात्पर्य जमीन सर्वे से हैं। इसमें पूर्व में किये गए सर्वे की कमियों को सुधर कर नया रूप दिया जाता हैं।पुराने नक़्शे के आधार पर नया नक्शा बनाया जाता हैं। जमीन से सम्बंधित सभी कागजातों को बदलकर सर्वे समय का खतियान दे दिया जाता हैं. जिसमे उनके जमीन का बिवरण दर्ज होता हैं। सर्वे मुख्यता 50 वर्षों के बाद होता हैं।
सर्वे मुख्यतः तीन चरणों में कराया जाता हैं।
(१) किस्तवार (२) खानापूरी (३) तस्दीक एबं बुझारत
(१) किस्तवार- यह सर्वे का प्रथम चरण हैं। इस चरण किसी मौजा(गांव )में सर्वे प्रारम्भ किया जाता हैं। सर्वप्रथम वहां सर्वे अधिकारी जाकर एक ग्राम सभा आयोजन करतें हैं। उसमें सभी ग्रामीणों की उपस्थिति अनिवार्य होती हैं। इस बैठक में ग्रामीणों को सर्वे की सुचना दी जाती हैं तथा नियमो को समझाया जाता जाता हैं। उपस्थित ग्रामीणों से ही 11 सदस्यों की समितिबनाया जाता हैं जो सर्वे कार्यो का देख-रेख करती हैं। इसके बाद सर्वेयर अपनी प्रत्तिनियुक्ति आदेश पत्रके के पीछे सभी ग्रामीणों का हस्ताक्षर करा लेते हैं। सर्वेयर सर्वे कार्य प्रारम्भ कर देते हैं। इसके लिए सर्वप्रथम समिति के सदस्यों तथा गांव के बुजुर्गो के साथ गांव की परिसीमा(सरहद)के के चारो तरफ घूम कर देख लेते हैं। साथ ही साथ एक नजरिया नक्शा पुराने नक़्शे के आधार पर बना लेते हैं। इसके बाद प्लाट की पैमाइस कर उसका नक्शा बनाया जाता हैं। और सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं।
(२) खानापूरी - यह सर्वे का दूसरा चरण हैं। इस चरण के अंतर्गत जो कार्य किस्तवार में किया जा चूका हैं उसे आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक प्लाट में नंबर उत्तर-पश्चिम कोण से प्रारम्भ कर दक्षिण-पूर्व कोण कोण पर समाप्त करते हैं तथा जमीं से सम्बंधित सभी सभी कागजातों के बदले नया खतियान दिया जाता हैं। यहाँ सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं। परन्तु इसमें पारदर्शिता लाने के लिए तीसरा चरण भी किया जाता हैं।
(३ )तस्दीक एबं बुझारत -यह सर्वे का तीसरा एबं अंतिम चरण हैं। तस्दीक का अर्थ होता हैं समझाना तथा बुझारत का अर्थ समझ बुझ कर लिखना होता हैं। इस चरण में सर्वे की त्रुटियों को पूर्णत दूर कर लिया जाता हैं। इसके लिए समिति की सहायता से ग्रामसभा का आयोजन कराया जाता हैंतथा प्रत्येक बेक्ति को खतियान पढ़कर सुनाया जाता हैंयदि गलती होती हैं तो उसे सुधारा जाता हैं। इसके बाद सर्वे का काम समाप्त हो जाता हैं। समाप्ति के दो या तीन माह के अंदर प्रत्येक बेक्ति को खतियान दे दिया जाता हैं।
Very nice article
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